#ये राहें
कुछ दूरी तुम तय करो कुछ दूरी हम तय करें, बहुत दूर जो जाना है जरा साथ मिल कम करें, देखी जो एक मंजिल थी अभी बहुत दूर खड़ी है, राहों के इन कांटो को जरा मशहूर हम मिल करें। हो साथ तुम्हारा तो ये काटें भी फूल बन बरसे, मिलने को ये मंजिल खुद ब खुद हमसे यूँ तरसे, कि ये मंजिल तो बस एक पैगाम है उन गैरों लिए, जो लौट जाते हैं उल्टे पैर इन काँटों के डर से।